महाराष्ट्र की चीनी मिलें बड़ी मुसीबत में फंसी; चीनी की मांग में भी भारी गिरावट…

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Image Credits: abc.net.au

पुणे : चीनी मंडी चीनी उद्योग को मुसीबत से निकालने के लिए सरकार द्वारा ठोस उपायों के अभाव के कारण महाराष्ट्र राज्य में चीनी मिलों को अभूतपूर्व संकट का सामना करना पड़ रहा है। गन्ना क्रशिंग सीज़न शुरू होकर एक महिना हो गया, फिर भी अभी तक दक्षिण महाराष्ट्र की एक भी चीनी मिल ने किसानों के बैंक खाते में एकल एफआरपी की राशि जमा नहीं की है । चीनी की मांग घटने के कारण पिछले महीने लगभग 50 प्रतिशत चीनी बेचने में मिलें विफल रही है। चीनी मिलों के प्रतिनिधियों ने कहा कि, चीनी मांग में गिरावट के चलते मिलों पर आर्थिक दबाव बढ़ गया है।

निर्यातित चीनी की कीमत 385 डॉलर से घटकर 340 डॉलर हुई…

वैश्विक बाजार में, निर्यातित चीनी की कीमत 385 डॉलर से घटकर 340 डॉलर हो गई है। इसी प्रकार, डॉलर की कीमत 74 रुपये से 70 रुपये के नीचे गिर गई। नतीजा चीनी निर्यात है। बैंक चीनी निर्यात करने के लिए तैयार नहीं हैं । इसका परिणाम चीनी निर्यात पर है। मिलों को अभी तक पिछले साल की निर्यातित चीनी सब्सिडी नहीं मिली है। बफर स्टॉक होने के बाद छह महीने बीत चुके हैं और मिलों द्वारा इसकी सब्सिडी प्राप्त नहीं हुई है। चीनी उद्योग के सूत्रों ने बताया कि, इन सभी प्रतिकूल परिस्थिति के कारण किसानों का बकाया भुगतान मुश्किल हो गया है ।

बड़ी बड़ी मिलें भी आर्थिक संकट में…

पिछले कुछ वर्षों में इस साल यह पहली बार है कि, मिलों ने गन्ना क्रशिंग को महिना हो गया लेकिन अभी तक किसानों की पहली किस्त नहीं चुकाई है। कोल्हापुर और सांगली जिले की चीनी मिलें भी इस स्थिति से दूर नही है। मिलों ने दिवाली के बाद नियमित रूप से क्रशिंग शुरू किया है, लेकिन वर्तमान में किसी भी स्तर पर गन्ना भुगतान के प्रयास दिखाई नहीं दे रहे है। दक्षिण महाराष्ट्र में कई मिलों ने किसानों के साथ-साथ कई मिलों ने पिछले छह महीनों से मुजदूरों का वेतन भुगतान नहीं किया हैं । मिलों के सूत्रों ने कहा कि, मिलों को सभी स्तरों से दबाव से गुजरना पड़ रहा है।

सरकार द्वारा चीनी उद्योग को राहत नहीं…

वर्तमान स्थिति को देखते हुए, राज्य सरकार ने केंद्र सरकार से चीनी की न्यूनतम बिक्री मूल्य 3100 रुपये की मांग करने का वादा किया था; लेकिन इस संबंध में कोई प्रयास नहीं किए गए है । इसके अलावा, चीनी मिलों को 2900 रुपये में चीनी बेचनी भी मुश्किल हो गया है । सरकार की कोई सब्सिडी या कोई समर्थन नहीं होने के कारण इस मौसम को कैसे निपटाए इसी सोच में मिलें डूबी हुई है ।

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