एमएसपी वृद्धि के बाद हरियाणा के किसानों को प्रति एकड़ 6,000 से 18,000 रुपये का लाभ: मंत्री

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Image Credits: technologytimes.pk

हरियाणा के कृषि मंत्री ओ पी धनकड़ ने आज कहा कि खरीफ फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में वृद्धि के बाद हरियाणा के किसानों को प्रति एकड़ 6,000 से 18,000 रुपये तक का लाभ मिलेगा।
धनकड़ ने आज यहां कहा , ” केंद्र सरकार द्वारा अनुमोदित फसलों के एमएसपी में वृद्धि से हरियाणा के धान किसानों को 6,000 रुपये प्रति एकड़ , कपास किसानों को 18,000 रुपये प्रति एकड़ और बाजरा किसानों को 7,800 रुपये प्रति एकड़ का लाभ प्राप्त होगा। ”
उन्होंने कहा कि एमएसपी में वृद्धि के कारण हरियाणा को 1,500 करोड़ रुपये का लाभ मिलेगा जिसमें धान के लिए 1,200 करोड़ रुपये और अन्य फसलों के लिए 300 करोड़ रुपये शामिल होंगे।
मंत्री ने कहा कि हरियाणा में खेती देश में सबसे ज्यादा जोखिम मुक्त पेशा है।
उन्होंने विस्तार में जाते हुए कहा कि राज्य सरकार ने ‘ फसल बीमा योजना ‘ के तहत किसानों को 491 करोड़ रुपये का मुआवजा दिया है।
राजस्व और आपदा प्रबंधन विभाग के माध्यम से किसानों को 6,000 रुपये से 12,000 रुपये प्रति एकड़ तक की मुआवजा राशि दी गई।
वर्ष 2015 के दौरान , गेहूं की फसलों के लिए 1,092 करोड़ रुपये और कपास की फसलों के लिए 276 करोड़ रुपये दिए गए थे। इसके अलावा , पिछली सरकार के कार्यकाल से लंबित 268 करोड़ रुपये का मुआवजा भी मौजूदा राज्य सरकार द्वारा किसानों को दिया गया।
धनकड़ ने कहा कि कृषि क्षेत्र के सामने कुछ चुनौतियां हैं जिन्हें अवसरों में बदलने की जरुरत है। यहां पानी की उपलब्धता सबसे बड़ी चुनौती थी। अटल भू जल योजना के तहत , इस उद्देश्य के लिए हरियाणा को 712 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। हरियाणा के 36 ब्लॉक अत्यधिक पानी का उपयोग करते हैं और इन क्षेत्रों में सूक्ष्म सिंचाई को बढ़ावा देने के लिए , राज्य सरकार 85 प्रतिशत तक अनुदान दे रही है।
उन्होंने कहा कि राज्य में 1.30 लाख हेक्टेयर क्षेत्र सूक्ष्म सिंचाई के अंतर्गत आता है। इसके अलावा , सिंचाई के लिए एक लाख हेक्टेयर क्षेत्र में पाइपलाइन लगाई गई है जिससे सिंचाई वाले क्षेत्र में वृद्धि हो रही है। उन्होंने कहा कि ऐसे क्षेत्रों के लिए 75 करोड़ रुपये दिए गए हैं।
धनकड़ ने कहा कि राज्य में 54 मंडियों को ई – नाम से जोड़ा गया है।
इसके अलावा , नए मंडी भी विकसित किए जा रहे हैं। गन्नौर में 600 एकड़ से अधिक जमीन में देश की सबसे बड़ी मंडी की स्थापना की जा रही है जिसे विशेष उद्देश्यीय कोष के माध्यम से बनाया जाएगा और जिसके लिए मंत्रिमंडल द्वारा मंजूरी दी गई है।

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