‘मंथली रिलीज़ कोटा’ मुद्दे पर उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र की चीनी मिलें आमने-सामने

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Image Credits: India TV

पुणे: चीनी मंडी

उत्तर प्रदेश चीनी मिलर्स ने केंद्र सरकार से अनुरोध किया है कि चीनी के मासिक रिलीज कोटा प्रणाली को समाप्त किया जाए, जबकि महाराष्ट्र के मिलर्स कोटा सिस्टम जारी रखने के पक्ष में हैं , अगर कोटा सिस्टम खत्म हो जायेगा तब देश में चीनी की बिक्री और दरों में असमानता निर्माण होगी और इससे चीनी मिलों को घाटा होने की ही सम्भावना अधिक है । महाराष्ट्र के चीनी मिलों को यह डर सता रहा है कि अगर कोटा सिस्टम हटा दी जाए तो यूपी की चीनी मिलें अधिक मात्र में चीनी बाजार में उतार सकती है और महाराष्ट्र के चीनी मिलों की पारंपरिक चीनी मार्केट भी उत्तर प्रदेश की चीनी मिलें काबिज कर सकती है ।

चीनी का न्यूनतम बिक्री मूल्य २९ रूपये

केंद्र सरकार ने चीनी का मासिक रिलीज कोटा निर्धारित करने के साथ साथ चीनी का दर 29 रुपये किलोग्राम न्यूनतम बिक्री मूल्य निर्धारित किया है। इन दोनों निर्णयों के संयुक्त परिणाम के रूप में, एक्स-मिल चीनी की कीमतें 30-31 रुपये किलोग्राम की सीमा में चल रही हैं। बाजार में जादा चीनी आने से यह दर गिरने की सम्भावना है.

उत्तर प्रदेश में बम्पर चीनी उत्पादन

हालांकि, उत्तर प्रदेश में जहां हर साल चीनी उत्पादन बढ़ रहा है, उसके चलते वहाँ की चीनी मिलें जादा से जादा चीनी बेचने के लिए इच्छुक हैं। ताकि उससे वो गन्ना किसानों का बकाया मूल्य दे सके। लेकिन, महाराष्ट्र के चीनी उद्योग को लगता है कि छोटे आकार के चीनी सहकारी समितियों के अस्तित्व के लिए कोटा और चीनी रिलीज सिस्टम आवश्यक है।

…तो छोटी चीनी मिलें टिक नहीं पाएंगी

महाराष्ट्र राज्य सहकारी शुगर फेडरेशन के कार्यकारी संचालक प्रकाश नाइकनवरे ने कहा, चीनी का मासिक रिलीज कोटा प्रणाली राज्य की छोटी आकार की सहकारी मिलों को चीनी बेचने में काफी मददगार साबित हो रही है। कोटा सिस्टम को हटाने से बाजार में असंतुलन पैदा होने की आशंका है और उसमे बड़ी मिलों के सामने छोटी मिलें टिक नहीं पाएंगी ।

चीनी निर्यात १० लाख टन होने की आशंका

घरेलू बाजार में चीनी बिक्री पर प्रतिबंधों के चलते आर्थिक दबाव से निपटने के लिए, चीनी उद्योग के दिग्गज चाहते हैं कि, सरकार देश से चीनी निर्यात बढ़ाने के लिए निर्यात नीति को सरल और पुख्ता बनाए । 2017-18 साल के लिए सरकार ने 2० लाख टन चीनी निर्यात अनिवार्य कीया है, लेकिन व्यापार सूत्रों के अनुसार वास्तविक निर्यात करीब १० लाख टन हो सकती है ।

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