चीनी मिलों ने सरकार से टिकाऊ ईंधन को बढ़ावा देने के लिए नीतिगत ढांचे की मांग की

नई दिल्ली : भारतीय चीनी एवं जैव-ऊर्जा निर्माता संघ (ISMA) ने कहा कि, उसने केंद्रीय खाद्य, सार्वजनिक वितरण एवं उपभोक्ता मामलों के मंत्री प्रहलाद जोशी के समक्ष एक विस्तृत प्रस्तुति दी है, जिसमें चीनी मिलों को जैव-रिफाइनरियों में बदलने के लिए नीतिगत ढांचे की मांग की गई है। ISMAने एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा कि, जैव-एथेनॉल, जैव-बिजली और जैव-गैस के साथ-साथ ये इकाइयां टिकाऊ विमानन ईंधन, हरित हाइड्रोजन, ई-100 और 2-जी एथेनॉल जैसी उभरती हुई ऊर्जा धाराओं का भी उत्पादन कर सकती हैं।

ISMA के महानिदेशक दीपक बल्लानी ने कहा कि, ISMAने 55 मिलियन भारतीय गन्ना किसानों, जो पहले से ही कारों के लिए ईंधन बनाने के लिए कच्चा माल उपलब्ध करा रहे हैं, को विमानन ईंधन की आपूर्ति करने के लिए एक रोडमैप पर चर्चा की।उन्होंने बताया कि, सरकार ने पिछले साल 400 ई-100 (100% एथेनॉल) पंपों का अनावरण किया था।ISMA ने कहा कि, प्रतिनिधिमंडल ने इन नई, उच्च तकनीक वाली चीनी मिलों को जल्दी से जल्दी बनाने के लिए सरकार के साथ मिलकर काम करने का आश्वासन दिया।

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